शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026
हमारा प्रकृति
प्रकृति, अनंत विशाल विचारों का केन्द्र,
सुंदरता का प्रवाह, पुनर्जन्म का पंथ।
हरियाली से सजी, फूलों की आभा,
प्रगट होती है नित्य, नवीनता की राह।
पहाड़ों की उचाईयों में बसे अम्बरी धूप,
गहरे वनों में घूमते हैं नीले रंग के झूल।
नदियां बहती हैं तरंगों की मधुर सुरी,
मन को शांति देती हैं ये जल की सौगंधरी।
पक्षियों की चहचहाहट, मृगों की डगमगाहट,
वनवासियों की जीवन गाथा, सभी की बहुमूल्य संपत्ति।
प्रकृति माता की वरदान, हमारी आधारशिला,
संतुलन और समरसता का सर्वोच्च गुणवत्ता।
हमारा ध्यान रखें, प्रकृति की रक्षा करें,
वनों को बचाएं, प्रदूषण को कम करें।
अपनी ज़िन्दगी में प्रकृति का सम्मान करें,
हर मानव इस जगती में एक नेतृत्व बनें।
चलो मिलकर बढ़ाएं प्रकृति के संकल्प,
हर दिन वृक्षारोपण का संकल्प हो हमारा।
प्रकृति के संगीत को अपने हृदय में संगीतित करें,
खुशियों की नयी राह पर नगमे गाती हैं।
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